पानी से भी सस्ता हुआ कच्चा तेल, 18 साल के निचले स्तर पर क्रूड फिर भी भारत में कम क्यों नहीं होते पेट्रोल-डीजल के दाम

     सुनने में भले ही यह अजीब लगे पर है यह सोलह आने सच। कच्चा तेल अब पानी से भी सस्ता हो गया है। कोरोना के कहर से दुनिया के अधिकतर देशों में लॉकडाउन है। इसकी वजह से पेट्रोल-डीजल की मांग घटी है तो वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब और रूस के बीच कीमत युद्ध के चलते कच्चा तेल और कमजोर हुआ है। हालात यह है कि एक लीटर कच्चे तेल का दाम एक लीटर बोतल बंद पानी की कीमत से भी नीचे पहुंच गया है। मौजूदा रेट के मुताबिक एक बैरल कच्चा तेल भारतीय रुपये में करीब 1500 रुपये का पड़ रहा है। एक बैरल में 159 लीटर होते हैं और ऐसे में एक लीटर कच्चे तेल का दाम 9.43 रुपये प्रति लीटर से भी कम पड़ रहा है, जबकि भारत में पानी की एक बोतल 20 रुपये में मिलती है।



     समाचार के मुताबिक एशियाई बाजारों में मंगलवार को तेल कीमतों के 18 साल के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद, कीमतों में तेज सुधार देखने को मिला। कारोबारियों ने बताया कि कोरोना वायरस महामारी के चलते बढ़ती आशंकाओं के बीच निवेशकों ने नीतिनिर्माताओं के कदम पर भरोसा किया। अमेरिकी मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 7.3 प्रतिशत उछलकर 21.5 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 3.3 प्रतिशत की तेजी के साथ 23.5 डॉलर प्रति बैरल पर था।


     न्यूयॉर्क में सोमवार को कीमतें 2002 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं थीं और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कुछ समय के लिए 20 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गया था। दुनिया भर में कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए सरकारें लॉकडाउन कर रही हैं, जिसके चलते तेल की कीमतों में गिरावट आई है। सऊदी अरब और रूस के बीच कीमत युद्ध के चलते कच्चा तेल और कमजोर हुआ है। इसबीच खबर आई कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के बीच सोमवार को तेल कीमतों पर चर्चा हुई। ऐसे में माना गया कि रूस और सऊदी अरब के बीच उत्पादन को लेकर सहमति बन सकती है।