थावे वाली माता के मंदिर में दूर-दूर के भक्तों की है गहरी आस्था - महत्व

     बिहार में गोपालगंज जिले के थावे दुर्गा मंदिर में सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। गोपालगंज का सुप्रसिद्ध थावे दुर्गा मंदिर दो तरफ से जंगलों से घिरा है और इस मंदिर का गर्भगृह काफी पुराना है। इस मंदिर में नेपाल, उत्तर प्रदेश, बिहार के कई जिले से श्रद्धालु पूजा-अर्चना एवं दर्शन करने आते हैं। वैसे यहां सालों भर भक्तों की कतार लगी रहती है, लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्र में पूजा करने का ज्यादा महत्व है।



     नवरात्रि के नौ दिनों में यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रों में यहां खास मेला भी लगाया जाता है। इसके अलावा इस मंदिर में सोमवार और शुक्रवार को विशेष पूजा होती है।


   सावन के महीने में भी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस मंदिर को लोग थावे वाली माता का मंदिर, सिंहासिनी भवानी के नाम से भी जानते हैं। यहां नवरात्रि में पशुबलि देने की भी परम्परा है। लोग मां के दरबार में खाली हाथ आते हैं लेकिन मां के आशीर्वा से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। थावे दुर्गा मंदिर सिद्धपीठ माना जाता है।


   रामनवमी के अवसर पर राज्य सरकार दो दिवसीय थावे महोत्सव आयोजित करती है लेकिन इस बार लॉकडाउन के कारण महोत्सव का आयोजन नहीं किया गया है।