अमित शाह की वर्चुअल रैली - पुरानी रैलियों से कितनी अलग

     बंगाल बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पार्टी की प्रदेश शाखा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहली वर्चुअल रैली के लिए बीते कई दिनों से बड़े पैमाने पर प्रचार कर रही थी. बिहार की रैली के बाद पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ ही आम लोगों में भी उत्सुकता बढ़ गई थी. सबकी ज़ुबान पर कई सवाल थे. मसलन आख़िर यह वर्चुअल रैली होती क्या है और इसका आयोजन कैसे किया जाता है? असल रैली और इसमें क्या फ़र्क़ है ?



वर्चुअल रैली का अनुभव - इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए ही दक्षिण कोलकाता के एक बूथ में जुटे बीजेपी कार्यकर्ता सुरेश कुमार मंडल कहते हैं, "यह अनुभव टीवी पर किसी नेता का भाषण सुनने की तरह ही था. लेकिन शाह जी ने इसके ज़रिए अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों का प्रचार शुरू कर दिया है."


     वह कहते हैं कि वर्चुअल रैली कभी असली रैली की जगह नहीं ले सकती. स्टेडियम या किसी बड़े मैदान में होने वाली रैली में शामिल होने का जो रोमांच होता है वह इसमें नदारद था.


     कोरोना की वजह से सोशल डिस्टेंसिंग के नियम ने भी इसका मज़ा किरकिरा कर दिया. दक्षिण 24-परगना के बारुईपुर के रहने वाले ज्ञानेश्वर दास ने तो अपने स्मार्टफ़ोन के ज़रिए पार्टी के फ़ेसबुक पेज पर ही शाह का भाषण सुना. वह कहते हैं, "शाह का भाषण तो अच्छा था. लेकिन इसमें असली रैली वाला माहौल नहीं था."