बात सच्ची और अच्छी हो तो.....दिवाली सादगी से मनाएं

लेख - विनोद सेतिया (संस्थापक एवं अध्यक्ष सहायता सागर संस्थान जयपुर, राजस्थान)


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     बहुत सारी जनता यह कह रही है कि सरकार ने इस दिवाली पर पटाखों पर रोक लगाकर गलत किया है. यह पटाखों की आग उन लोगों को ही लग रही है, जिनकी जेब और बैंक खातों में पैसा तांडव कर रहा है और जिस का घर इस "कोरोना" महामारी से बचा हुआ है.


     जो लोग जो लोग इस दिवाली पर पटाखों का विरोध कर रहे हैं. मेरा उनसे हाथ जोड़कर विनम्र अनुरोध है कि वह अपने आस पड़ोस, गली मोहल्ले, अपने सर्किल और शहर में आसपास नजर उठा कर देखे कि जिन घरों में कुछ दिन पहले ही घर का बुजुर्ग चला गया हो. मां-बाप, बहन, भाभी-भाई, साला-जीजा कोई भी हो सकता है जो अब इस दुनिया में ना हो !  जरा उन लोगों के बारे में सोचो. यह विष रूपी '"यह साल किसी के "अपने" ले गया, तो किसी अपने के "सपने" ले गया है" !


     जब हम देश के लिए जो शहीद होते हैं उनके लिए शोक मनाते हैं, तो क्या हम 1 साल दिवाली शांति से मना लेंगे तो क्या लक्ष्मी जी नाराज हो जाएंगी ? आप कृपा उन लोगों के बारे में सोचो, जिनको इस बार दीपक में तेल डालने के लिए भी सोचना पड़ेगा. ऐसे बहुत से वर्ग के लोग हैं जिनका उल्लेख करना मैं यहां जरूरी नहीं समझता हूं, अगर आप सभी लोग एक दिवाली उन सभी का दिल ना जला कर दीपक जला लोगे तो आपका कुछ बिगड़ नहीं जाएगा!  सभी देशवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं.