बेहद सो सोचनीय एवं विचारणीय प्रश्न है ?

From - अभिषेक जैन बिट्टू, संयुक्त अभिभावक संघ (राजस्थान)


     एक तेलंगाना की बेटी जिसने ना केवल अपनी शिक्षा का बलिदान दिया बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति के चलते अपने आपका भी बलिदान कर डाला। आज सुबह जब इस खबर को देखा तो मन बहुत विचलित हो गया कि आखिरकार हमारा देश किस और बढ़ रहा है। यह तमाचा ना केवल सरकार और स्कूल पर बल्कि यह तमाचा समाज पर है। जो चुप रहकर ना केवल सरकारों को संरक्षण देती है बल्कि स्कूल संचालकों को भी संरक्षण देती है।


(File Photo - अभिषेक जैन बिट्टू)



     आज जिस प्रकार पूरे देश का अभिभावक संघर्ष कर रहा है हर राज्य में फीस में रियायत की मांग कर रहा है। क्या वह नाजायज है ? वो अभिभावक क्यो फीस देंवे, जो सुविधा ना उसने ली ना ही उसके बच्चे ने ली ? तेलंगाना ने जिस प्रकार एक बेटी ने आत्महत्या की वह केवल आत्महत्या नही बल्कि सोची - समझी साजिश है, जिसे सरकार और निजी स्कूलों द्वारा की गई हत्या है।


     क्या अब शिक्षा के लिए भी बच्चो को आत्महत्या जैसे निर्णय का सहारा लेना पड़ेगा। क्या निजी स्कूल संचालक ऐसी हठधर्मिता का प्रदर्शन कर अभिभावकों को आत्महत्या करने के लिए उकसा रहे है ? भारत देश मे एक नारा बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का चलता है, लेकिन तेलंगाना की घटना ने बता दिया कि बेटी को पढ़ना है तो आत्महत्या का सहारा बने ?


बेहद दुःखद घटना, सामाजिक नागरिक होने के नाते बहुत ही शर्मशार हु।


क्या सरकार और निजी स्कूल संचालक ऐसी घटनाओं के लिए शर्मशार है ?


क्या अब इस देश मे शिक्षा का स्तर केवल पैसों के रास्ते से होकर गुजरेगा ?