निगम चुनाव में दिखा स्कूल फीस मुद्दे का खासा असर, हैरिटेज के बाद अब ग्रेटर में भी हुई कम वोटिंग

पक्ष और विपक्ष को जनता ने नकारा


स्कूल फीस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की चुपी से नाराज है अभिभावक


इस बार जयपुर नगर निगम चुनाव में अभिभावकों ने किया था राजनीतिक दलों का बहिष्कार, हैरिटेज के 11 वार्ड और ग्रेटर के 27 वार्ड में निर्दलीय प्रत्याशियों को समर्थन


     जयपुर। रविवार को जयपुर में द्वितीय चरण के मतदान के साथ ही नगर निगम चुनाव सम्पन्न हो गए. अब मंगलवार को इसके परिणाम सामने आएंगे। इस चुनाव में संयुक्त अभिभावक संघ ने सभी राजनीतिक दलों के बहिष्कार के साथ हैरिटेज के 11 वार्डो और ग्रेटर के 27 वार्डो में निर्दलीय प्रत्याशियों से लिखित समर्थन प्राप्त कर उन्हें समर्थन देने का एलान किया था. जिसका खासा असर इस चुनाव में देखने को मिला, जहां हैरिटेज चुनाव में 57.64 फीसदी वोटिंग हुई. वही ग्रेटर में भी कम वोटिंग देखी गई। वोटिंग कम होने पर संयुक्त अभिभावक समिति ने दावा किया कि अभिभावकों की अपील का असर इस चुनाव में देखने को मिला है क्योंकि अभिभावक पिछले 6 महीनों से "राहत की भीख मांग रहा है" किंतु सभी राजनीतिक दल ने अभिभावकों की पीड़ा को नजरअंदाज कर चुपी साध कर अभिभावकों के सम्मान को जो ठेस पहुंचाई है, जिसके चलते संयुक्त अभिभावक संघ को इस चुनाव में राजनीतिक दलों के बहिष्कार की घोषणा की. जिसका अभिभावकों ने भरपूर समर्थन किया।



     संयुक्त अभिभावक संघ सदस्य युवराज हसीजा और मनोज जसवानी ने कहा कि यह चुनाव अभिभावकों के आत्मसम्मान को बचाये रखने का चुनाव था। आज जिस प्रकार पिछले 6 महीनों से अभिभावकों के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है उन्हें ना केवल प्रताड़ित किया जा रहा बल्कि अपमानित तक किया जा रहा है. ऐसी स्थिति के बावजूद राजनीतिक दलों की चुप्पी ने अभिभावकों के सम्मान को ठेस पहुंचाई है। अभिभावकों के सम्मान को बचाये रखने के लिए इस बार अभिभावक संघ ने निगम चुनाव का सहारा लिया और चुनाव लड़ रहे निर्दलीय प्रत्याशियों से ना केवल चर्चा की बल्कि जिन प्रत्याशियों को समर्थन दिया, उन सभी से "स्कूल फीस मुद्दा और शिक्षा में सुधार पर कार्य करने" का सहमति शपथ पत्र तक भरवाया गया है।


     संघ सदस्य अरविंद अग्रवाल और मनोज शर्मा भाया ने जानकारी देते हुए कहा कि यह चुनाव किसी की हार जीत का नही बल्कि राजनीतिक दलों को सबक सिखाने का चुनाव था, जिसके लिए संयुक्त अभिभावक संघ ने जयपुर के करीबन 2 लाख से भी अधिक मतदाताओं तक अपनी बात रखी और उन सभी से राजनीतिक दलों के बहिष्कार की अपील की। इस मुहिम का भरपूर समर्थन अभिभावकों द्वारा किया गया। जिसका असर मंगलवार को आने वाले परिणामों में साफ - साफ देखा जाएगा। हमे उम्मीद है इस चुनाव में बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशी जीतकर आएंगे और राजनीतिक दल मुंह ताकते रह जाएंगे। संयुक्त अभिभावक संघ ने इस चुनाव में स्कूल फीस मुद्दे को प्रथम वरीयता में रखने का प्रयास किया और राजनीतिक दलों को अंतिम पायदान पर रखा था। क्योंकि हम राजनीतिक दलों को जताना चाहते थे कि " जनता से उनका अस्तित्व है, जनता का अस्तित्व राजनीतिक दलों से नही है।"


रविवार से संयुक्त अभिभावक संघ लड़ेगा अभिभावकों की लड़ाई


     समिति सदस्य अभिषेक जैन बिट्टू ने जानकारी दी कि पिछले 6 महीनों से संयुक्त अभिभावक समिति अभिभावकों के सम्मान की लड़ाई लड़ रही है. जिसे समिति के सभी सदस्यों की सहमति के साथ संयुक्त अभिभावक संघ (SAS) नाम दिया गया है, बकायदा संयुक्त अभिभावक संघ के रजिस्ट्रेशन की कार्यवाही लगभग पूरी कर ली गई है। 31 अक्टूबर तक संयुक्त अभिभावक समिति द्वारा किये गए सभी कार्यक्रमों की जवाबदेही संघ की रहेगी और 1 नवम्बर से सभी कार्यक्रम संयुक्त अभिभावक संघ करेगा। आने वाले दिनों में संघ की नवीन कार्यकारिणी की सूची सभी सदस्यों की सहमति से जारी कर दी जाएगी।