राजस्थान के राज्यपाल ने मुख्यमंत्री पर फोड़ा 'लेटर बम'

      राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि संवैधानिक मर्यादा से ऊपर कोई नहीं है. 23 जुलाई को सरकार ने रात को अल्प नोटिस के सत्र आहूत करने की पत्रावली पेश की थी. राज्य सरकार को यह भी सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी विधायकों की स्वतंत्रता एवं उनका स्वतंत्र आवागमन भी सुनिश्चित किया जाए. राज्य सरकार के पास अगर बहुमत है तो विश्वासमत प्राप्त करने हेतु सत्र आहूत करने का क्या औचित्य है. फिर कुछ विधायकों की निर्योग्यता का प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय और माननीय सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है उनका संज्ञान भी लिए जाने के निर्देश राज्य सरकार को दिए गए हैं. राज्यपाल ने अशोक गहलोत सरकार से विधानसभा सत्र से जुड़े 6 सवाल पूछे हैं.



1. विधानसभा सत्र को किस तिथि से आहूत किया जाना है, इसका उल्लेख केबिनेट नोट में नहीं है और न ही केबिनेट द्वारा कोई अनुमोदन प्रदान किया गया है. 


2. अल्प सूचना पर सत्र बुलाए जाने का न तो कोई औचित्य प्रदान किया गया है और न ही कोई एजेंडा प्रस्तावित किया गया है. सामान्य प्रक्रिया में सत्र आहूत किए जाने के लिए 21 दिन का नोटिस दिया जाना आवश्यक होता है.


3. राज्य सरकार को यह भी सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी विधायकों की स्वतंत्रता एवं उनका स्वतंत्र आवागमन भी सुनिश्चित किया जाए. 


4. कुछ विधायकों की निर्योग्यता का प्रकरण उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है. उसका संज्ञान भी लिया जाए. कोरोना के राजस्थान राज्य में वर्तमान परिपेक्ष्य में तेजी से फैलाव को देखते हुए किस प्रकार से सत्र आहूत किया जाएगा?


5. प्रत्येक कार्य के लिए संवैधानिक मर्यादा और सुसंगत नियमावलियों में विहित प्रावधानों के अनुसार ही कार्यवाही की जाए.


6.राज्य सरकार का बहुमत है तो विश्वास मत प्राप्त करने हेतु सत्र आहूत करने का क्या औचित्य है?


      साथ ही राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्रा ने सीएम अशोक गहलोत से पूछा है कि क्या राजस्थान में कानून व्यवस्था खत्म हो गई है, जो आज आपने बयान दिया था कि मुख्यमंत्री और उसका गृह मंत्रालय घेराव की स्थिति में राजभवन की सुरक्षा नहीं कर सकता? फिर ऐसे स्थिति में किस एजेंसी से सुरक्षा के लिए संपर्क करें बताएं?