डर के आगे जीत है

 From - ओम माथुर

      हमारी समस्या ये है कि हम कोरोना से भी बचना चाहते हैं और इस दौर में भी अपनी जिन्दगी में सब कुछ पहले जैसा चाहते हैं। त्यौहार, उत्सव, आयोजन होते रहेंगे, लेकिन उसके लिए जिन्दा रहना जरूरी है। सरकारें हमारा ध्यान नहीं रखेंगी। वो केवल योजनाएं बनाएंगी। उनका प्रचार करेगी। उनका जमीनी स्तर पर कितना अमल हो रहा है, इसे देखने की फुर्सत उन्हें नहीं है। 

     सरकारी अस्पतालों में बैड की कमी नहीं होने और कोरोना के इलाज की पर्याप्त व्यवस्थाएं होने की खबरों पर यकीन करके अपना जीवन जोखिम में मत कीजिए। अस्पतालों में हालात बेकाबू और जगह कम है।  भगवान ना करें,अगर किसी प्राइवेट अस्पताल में बडी सिफारिश से भर्ती भी हो गए, तो सारी जमा पूंजी कोरोना की भेंट चढ जाएगी। बच गए, तो भी शरीर कई दूसरी बीमारियों से आबाद हो जाएगा।  

     आप कोरोना को धोखा नहीं दे सकते, होशियारी दिखाने के चक्कर में उसकी चपेट में आने से बचिए। क्योंकि यहां डर और सर्तकता के आगे जीत है। 

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