वसंत पंचमी

From - रविशराय गौड़ (ज्योतिर्विद-अध्यात्मचिन्तक)

     आज यानी 16 फरवरी को वसंत पंचमी पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में बसंत पंचमी या वसंत पंचमी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा के साथ पवित्र नदी में गंगा स्नान का भी महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। बसंत पंचमी के दिन अबूझ मुहूर्त होता है। जिसमें विवाह, सगाई और निर्माण जैसे शुभ कार्य बिना मुहूर्त के किए जाते हैं। कहते हैं कि अगर कुंडली में विद्या बुद्धि का योग नहीं है या शिक्षा में बाधा आ रही है तो बसंत पंचमी के दिन पूजा करके उसे ठीक किया जा सकता है। इस साल बसंत पंचमी 16 फरवरी 2021 (मंगलवार) को है। कहते हैं कि बसंत पंचमी के दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। 

बसंत पंचमी के दिन न करें ये गलतियां-

     बसंत पंचमी के दिन पीले या सफेद वस्त्र पहनने चाहिए। काले या लाल वस्त्र न पहनें। मां सरस्वती की पूजा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके शुरू करनी चाहिए। बसंत पंचमी के दिन पूजा सूर्योदय के बाद ढाई घंटे या सूर्यास्त के बाद के ढाई घंटे में करनी चाहिए। इस दिन पूजा के दौरान मां सरस्वती को पीले या सफेद पुष्प जरूर अर्पित करने चाहिए। प्रसाद में मिसरी, दही व लावा आदि का प्रयोग करना चाहिए। इस दिन वाद-विवाद से बचना चाहिए।

बसंत पंचमी शुभ मुहूर्त- बसंत पंचमी के दिन इस दो खास संयोग बन रहे हैं।  16 फरवरी को सुबह 03 बजकर 36 मिनट पर पंचमी तिथि लगेगी, जो कि अगले दिन यानी 17 फरवरी को सुबह 5 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में पंचमी तिथि 16 फरवरी को पूरे दिन रहेगी। इस वर्ष बसंत पंचमी पर दो विशेष योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन अमृत सिद्धि योग और रवि योग का संयोग बनने जा रहा है। बसंत पंचमी पर पूरे दिन रवि योग रहेगा। जिससे इस पर्व का महत्व और भी अधिक बढ़ जाएगा। इस बार बसंत पंचमी पर रेवती नक्षत्र रहेगा। इसे बुध का नक्षत्र माना जाता है और ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, चातुर्य और वाकपटुता यानि वाणी का कारक माना गया है। इसलिए इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी। वसंत पंचमी पर बुध, गुरु, शुक्र व शनि चार ग्रह शनि की राशि मकर में चतुष्ग्रही योग का निर्माण कर रहे हैं। मंगल अपनी राशि में विद्यमान रहकर इस दिन के महात्म्य में वृद्धि करने करेगा।

     बसंत पंचमी 16 फरवरी (मंगलवार) को मनाई जाएगी।  इस दिन से ही बसंत ऋतु का आगमन होता है। इसके साथ ही इस दिन ही मां सरस्वती की उपत्ति भी हुई थी। यह दिन छात्रों, कला, संगीत आदि क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए बेहद खास होता है। बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का भी विशेष महत्व होता है। बसंत पंचमी का दिन विद्या आरंभ या किसी भी शुभ कार्य के लिए  उत्तम माना जाता है।  इस त्योहार को लेकर मान्यता है कि सृष्टि अपनी प्रारंभिक अवस्था में मूक, शांत और नीरस थी। चारों तरफ मौन देखकर भगवान ब्रह्मा जी अपने सृष्टि सृजन से संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का और इससे अद्भुत शक्ति के रूप में मां सरस्वती प्रकट हुईं। मां सरस्वती ने वीणा पर मधुर स्वर छेड़ा जिससे संसार को ध्वनि और वाणी मिली। इसलिए बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा का विधान है। वसंत पंचमी पर बुध, गुरु, शुक्र व शनि चार ग्रह शनि की राशि मकर में चतुष्ग्रही योग का निर्माण कर रहे हैं। मंगल अपनी राशि में विद्यमान रहकर इस दिन के महात्म्य में वृद्धि करने करेगा।

     मान्यता है कि इस दिन आराधना करने से माता सरस्वती शीघ्र प्रसन्न होती हैं और ज्ञान का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इस दिन भगवान शिव-माता पार्वती के विवाह की लग्न लिखी गई। विद्यार्थी और कला साहित्य से जुड़े हर व्यक्ति को इस दिन मां सरस्वती की पूजा अवश्य करनी चाहिए। इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा कभी विफल नहीं जाती। मां सरस्वती की पूजा से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। इस दिन घर में मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर अवश्य स्थापित करें। घर में वीणा रखने से घर में रचनात्मक वातावरण निर्मित होता है। घर में हंस की तस्वीर रखने से मन को शांति मिलती है और एकाग्रता बढ़ती है। मां सरस्वती की पूजा में मोर पंख का बड़ा महत्व है। घर के मंदिर में मोर पंख रखने से नकारात्मक ऊर्जा का अंत होता है। कमल के फूल से मां का पूजन करें।  बसंत पंचमी के दिन विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्य संपन्न कराए जाते हैं। बसंत पंचमी के दिन शिशुओं को पहली बार अन्न खिलाया जाता है। इस दिन बच्चों का अक्षर आरंभ भी कराया जाता है। बसंत पंचमी में पीले रंग का विशेष महत्व है। पूजा विधि में पीले रंग की वस्तुओं का प्रयोग करें। पीले रंग के व्यंजन बनाए जाते हैं। बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्नी रति की भी पूजा की जाती है।

     बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने के लिए सबसे पहले सरस्वती की प्रतिमा रखें। कलश स्थापित कर सबसे पहले भगवान गणेश का नाम लेकर पूजा करें।  सरस्वती माता की पूजा करते समय सबसे पहले उन्हें आमचन और स्नान कराएं। माता को पीले रंग के फूल अर्पित करें, माला और सफेद वस्त्र पहनाएं फिर मां सरस्वती का पूरा श्रृंगार करें। माता के चरणों पर गुलाल अर्पित करें। सरस्वती मां पीले फल या फिर मौसमी फलों के साथ-साथ बूंदी चढ़ाएं।  माता को मालपुए और खीर का भोग लगाएं। सरस्वती ज्ञान और वाणी की देवी हैं। पूजा के समय पुस्तकें या फिर वाद्ययंत्रों का भी पूजन करें। कई लोग बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का पूजन हवन से करते हैं। अगर आप हवन करें तो सरस्वती माता के नाम से 'ओम श्री सरस्वत्यै नम: स्वहा" इस मंत्र से एक सौ आठ बार जाप करें। साथ ही संरस्वती मां के वंदना मंत्र का भी जाप करें।

मां सरस्वती मंत्र

ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।

कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।

वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।

रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।

सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च ।।

सरस्वती वंदना

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता 

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। 

या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता 

सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥ 

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं 

वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌। 

हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌ 

वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥२॥ 

नारायण श्रीनारायण

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