फिर उड़ी शिक्षा विभाग के आदेश की धज्जियां, रावत स्कूल में 12 वीं के छात्र की परीक्षा रोकी

News from - अभिषेक जैन बिट्टू

 स्कूल ने अभिभावक को कहा " फीस नही तो एक्जाम नही, जो करना है कर लो, सरकार फीस थोड़े ही दे रही है "

 संयुक्त अभिभावक संघ ने जिला शिक्षा अधिकारी को दी लिखित शिकायत

     जयपुर। निजी स्कूलों को लेकर फीस का बवाल अभी तक नही थमा है, इन दिनों स्कूलों में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं चल रही है तो स्कूल संचालकों ने परीक्षाओ को फीस वसूली का माध्यम बनाते हुए फीस का दबाव देना शुरू कर दिया है और फीस जमा ना होने की एवज में छात्रों की परीक्षाएं रोकी जा रही है। गुरुवार को न्यू सांगानेर रोड़ स्थित रावत सीनियर सेकेंडरी स्कूल में भी एक मामला ऐसा देखा गया जिसमें स्कूल संचालक ने 12 वीं के छात्र को फीस जमा ना होने के कारण वापस घर भेज दिया। जबकि मंगलवार को ही जिला शिक्षा अधिकारी ने पत्र जारी कर सभी स्कूलों को आदेश दिए थे कि फीस के अभाव में कोई भी स्कूल छात्र के एक्जाम ना रोके, उसके बावजूद शिक्षा विभाग के आदेश की धज्जियां उड़ाई गई। 

     अभिभावक रामावतार बैरवा ने इसकी शिकायत संयुक्त अभिभावक संघ के हेल्पलाइन 9772377755 नम्बर पर दर्ज करवाई, इसके बाद संघ प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल और प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू अभिभावक के साथ स्कूल पहुंचे और स्टाफ और प्रिंसिपल से मुलाकात की।

     प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि डेढ़ घन्टे के लम्बे इंतज़ार के बाद जब स्टाफ से वार्ता के दौरान विवाद होने लगा तो स्कूल प्रिंसिपल ने अभिभावक और संघ पदाधिकारियों से वार्ता की। स्टाफ से जब वार्ता हुई तो उनसे पूछा गया कि " छात्र को परीक्षा में नही बैठने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि फीस जमा नही है इसलिए बैठने नही दिया गया। जब तक फीस जमा नही होगी एक्जाम नही देने दिया जाएगा। " 

     जिस पर प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने 03 मई 2021 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश और 14 दिसम्बर को जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश की जानकारी दी तो स्कूल स्टाफ ने कहा कोर्ट और सरकार क्या कर लेंगी, फीस वह थोड़े ही जमा करवाएंगे। जो होगा देख लेंगे, स्टाफ की इस बात पर विवाद बढ़ता देख प्रिंसिपल ने मामले दखल दिया, उससे पूर्व वह बाहर खड़े होकर स्टाफ की बत्तमीजियां ही देखती रही। प्रिंसिपल ने अभिभावक रामवतार बैरवा की शिकायत को सुना और समझा, जो पेपर आज छूट गया उसे आगे करवाने का आश्वासन दिया साथ ही कल सुबह से वह नियमित एक्जाम देना शुरू कर देंगा। 

     अभिभावक की शिकायत के आधार पर संयुक्त अभिभावक संघ जयपुर जिला शिक्षा अधिकारी रविन्द्र कुमार और संयुक्त निदेशक धनश्याम दत्त जाट को पत्र लिखकर स्कूल की शिकायत दर्ज करवाई, स्कूल में करीबन 250 से अधिक छात्र ऐसे है जिनकी फीस बकाया चल रही है, उन छात्रों के अभिभावकों से डेली जिहजुरी करवा एक्जाम लिए जा रहे है। खुद स्कूल की प्रिंसिपल ने वार्ता के दौरान कबूला है कि 250 से अधिक बच्चे है जिनकी फीस बकाया चल रही है। संयुक्त अभिभावक संघ ने स्कूल प्रिंसिपल से वार्ता के दौरान सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना सुनिश्चित करते हुए फीस निर्धारित करने की बात कही जिसे प्रिंसिपल ने अनसुना कर दिया। 

शिक्षा मंत्री सहित 6 जिलों संयुक्त निदेशक, जिला शिक्षा अधिकारीयों दी शिकायत

     संयुक्त अभिभावक संघ ने जयपुर सहित कोटा, जोधपुर, अजमेर, चुरू, बीकानेर के अभिभावकों की शिकायत के आधार पर शिक्षा मंत्री बीड़ी कल्ला, संयुक्त निदेशक और जिला शिक्षा अधिकारियों को अभिभावकों की और से प्राप्त शिकायतों का हवाला देकर संयुक्त अभिभावक ने पत्र लिखकर स्कूलों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की है, जयपुर संभाग संयुक्त निदेशक शिक्षा विभाग घनश्याम दत्त जाट से वार्ता भी हुई किन्तु वह गुरुवार को छुट्टी पर थे उन्होंने शुक्रवार को कार्यवाही का पूरा आश्वासन दिया। 

राज्यपाल कलराज मिश्र को भी लिखा पत्र, बीकानेर की राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ वेटरनरी एवं एनिमल साइंसेज की प्रथम और चतुर्थ वर्ष की वार्षिक परीक्षा ऑनलाइन करवाने की मांग

     प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि बीकानेर में स्थित राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ वेटरनरी एवं एनिमल साइंसेज में पढ़ने वालों छात्रों के अभिभावक पिछले काफी दिनों से प्रथम और चतुर्थ वर्ष की वार्षिक परीक्षा को ऑनलाइन करवाने की मांग कर रहे थे। वहां की अभिभावक छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर काफी चिंतित है क्योंकि यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ सुभाष कुमार गर्ग पूरे परिवार सहित कोरोना संक्रमित पाए गए, कॉलेज में पढ़ने वाले अधिकतर छात्र कोरोना संक्रमित आ रहे जिलों और राज्यो से ताल्लुक रखते है जिसमे प्रदेश के जयपुर, जोधपुर, अलवर और राज्यों में तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र के छात्रों की संख्या अधिक है और यही से सर्वाधिक मामले देखने को मिल रहे है। ऐसे में सतर्कता बरतनी बहुत जरूरी है और कोरोना के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए वार्षिक परीक्षा ऑनलाइन ही होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर राज्यपाल को पत्र लिखा है। अगर ऑनलाइन परीक्षा नही होती है तो बहुत सारे छात्र परीक्षा देने से वंचित रह सकते है जिससे उनक साल भी खराब होगा।




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