मध्य प्रदेश सरकार संकट : फ्लोर टेस्ट कैंसल, सुप्रीम कोर्ट पहुंचे शिवराज सिंह चौहान

  • मध्य प्रदेश में फ्लोर टेस्ट नहीं, सुप्रीम कोर्ट पहुंची बीजेपी

  • बीजेपी की तरफ से शिवराज सिंह चौहान ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की

  • शिवराज सिंह ने 48 घंटे के अंदर फ्लोर टेस्ट की मांग की है

  • शिवराज और अन्य 9 बीजेपी विधायकों की इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई संभव



     मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और बीजेपी नेता शिवराज सिंह चौहान ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा है कि मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार को तुरंत फ्लोर टेस्ट के लिए कहा जाए। अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि मध्यप्रदेश के गवर्नर लालजी टंडन ने 16 मार्च को फ्लोर टेस्ट के लिए कहा था लेकिन उसका पालन नहीं की किया गया। ऐसे में कमलनाथ सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह फ्लोर टेस्ट कराएं।

   अर्जी में कहा गया है कि कमलनाथ सरकार के 22 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं और 6 का इस्तीफा राज्यपाल मंजूर कर चुके हैं ऐसे में सरकार अल्पमत में आ गई है। राज्यपाल ने निर्देश दिया था कि 16 मार्च को फ्लोर टेस्ट कराय जाए। सुप्रीम कोर्ट में शिवराज सिंह चौहान और अन्य की ओर से अर्जी दाखिल कर मध्यप्रदेश विधानसभा के स्पीकर, मुख्यमंत्री कमलनाथ, विधानसभा के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, मध्यप्रदेश के चीफ सेक्रेटरी आदि को प्रतिवादी बनाया गया है।


   याचिका में कहा गया है कि 9 जजों की संवैधानिक बेंच ने एसआर बोमई बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस में कहा था कि अगर कुछ विधायकों या सांसदों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया हो और सरकार अल्पमत में आती प्रतीत होती है तो ये गवर्नर की ड्यूटी है कि वह फ्लोर टेस्ट के लिए कहे। इस मामले में गवर्नर ने फ्लोर टेस्ट के लिएनिर्देश दिया था, लेकिन जानबूझकर गवर्नर के आदेश का उल्लंघन किया गया है। इसी कारण ये अर्जी दाखिल की गई है। अर्जी में गुहार लगाई गई है कि सीएम व स्पीकर को निर्देश दिया जाए कि वह विधानसभा में 12 घंटे के भीतर फ्लोर टेस्ट कराएं।