लॉकडाउन में कमाने, खाने के संकट से जूझते ट्रांसजेंडर

     “हमारे आस-पास खाना नहीं मिल रहा है. घर में बनाने के लिए कुछ नहीं हैं. अगर कहीं रैन बसेरे में मिल भी रहा है तो वो घर से बहुत दूर है. लॉकडाउन में इतनी दूर कैसे जाएं?” कोरोना वायरस से संक्रमण के कारण फिलहाल पूरे भारत में 21 दिन का लॉकडाउन लगा हुआ है. मजदूरों और कामगारों की तरह ट्रांसजेंडर कम्युनिटी के सामने भी रोज़ी-रोटी के संकट खड़ा हो गया है. हालांकि उनकी समस्या विकट है.



पूरे परिवार का पेट भरने की चिंता - बिहार की रहने वाली सोनम टोला बधाई का काम करती हैं. वो हाल में अपने गांव से लौटी हैं. वो कहती हैं कि लॉकडाउन के बाद अब उन्हें अपनी ही नहीं बल्कि पूरे परिवार की चिंता है. सोनम कहती हैं, “बिहार में मेरे मां-बाप रहते हैं और मैं ही उनका खर्चा चलाती हूं. अभी मैं गांव से होकर आई हूं. वहां काफी खर्चा हो गया. सोचा था यहां आकर कमा लूंगी लेकिन अब तो सब बंद हो गया है. आगे अपने घर में क्या भेजूंगी ये समझ नहीं आता. कुछ पैसे बचे हैं वो दुख-बीमारी के लिए रखे हुए हैं. वरना उसमें हमारी कौन मदद करेगा? कोरोना से मरें ना मरें लेकिन बिना काम के घर पर रहकर ज़रूर मर जाएंगे.”


   नोएडा में सेक्स वर्कर का काम करने वालीं ट्रांसजेंडर आलिया लॉकडाउन के दौरान ऐसी ही कई दिक्कतों से गुज़र ही हैं. उनके पास कमाने का ज़रिया नहीं बचा और अब खाने, किराए की चिंता सता रही है. आलिया बताती हैं, “हमारे काम के बारे में पुलिसवाले जानते हैं. हम बाहर निकलते हैं तो उन्हें लगता है कि अपने काम के लिए ही निकल रहे हैं. इसलिए वो हमें टोक देते हैं. ऐसे में हमारी कमाई बंद हो गई है. हम आपस में पैसे इकट्ठे करके गुज़ारा कर रहे हैं. हमारा किराया ही पांच हजार रूपये है तो अगले कुछ महीनों में उसे कैसे चुकाएंगे?”