वृन्दावन के गीता आश्रम की नारायण सेवा बेसहारों का बनी सहारा

     उत्तर प्रदेश में राधा की नगरी वृन्दावन में चल रही नर सेवा नारायण सेवा इस कोरोना काल में बेसहारा लोगों का बड़ा सहारा बने के सामने आयी है। इस आश्रम में चल रही नर सेवा नारायण सेवा की सबसे बड़ी विशेषता भावात्मक सेवा है । आश्रम के प्रमुख से लेकर भेाजन वितरित करने वाले के चेहरे पर कृतज्ञता का भाव उस समय स्पष्ट दिखाई पड़ता है. जब कोई संत या अन्य व्यक्ति आश्रम के इस प्रसाद को स्वीकार कर लेता है।



     गीता के परम विद्वान महान संत गीतानन्द जी महराज ने हरिद्वार, कुरूक्षेत्र, पानीपत, लुधियाना, बांसवाड़ा रूद्रप्रयाग, करनाल एवं कुल्लू मे स्वयं द्वारा स्थापित आश्रमों में अन्न क्षेत्र की स्थापना करने के बाद वृन्दावन में गीता आश्रम की स्थापना कर अन्नक्षेत्र का कार्य शुरू कराया था । तब किसी ने यह कल्पना नही की थी कि कोरोना वायरस के संक्रमण का ऐसा समय आएगा जिसमें सहारा देनेवाले कुछ लोग बेसहारा बन जाएंगे किंतु आज के संदर्भ में इस महान संत की परिकल्पना भूखे को भेाजन और प्यासे को पानी देने का सहारा बन चुकी है।
     गीता आश्रम के प्रमुख महामंडलेश्वर अवशेषानन्द महराज ने कहा कि एक बार किसी पत्रकार ने गीतानन्द महराज से प्रश्न किया था कि वे अपने आश्रमों में संतों और गरीबों को नित्य भोजन कराकर उन्हें निठल्ले क्यों बना रहे है तथा उन्हें कोई रोजगार न करने की प्रेरणा क्यों दे रहे हैं तो उन्होंने कहा था कि सरकार भी गंभीर अपराधों में लिप्त अपराधियों को जेल में मुफ्त भोजन देती है। 


     वे चाहते हैं कि अपना घरबार छोड़कर जो संत भगवत भजन के लिए वृन्दावन समेत उक्त स्थानों में आए हैं उनके सामने भोजन की समस्या न हो क्योंकि तभी वे सही तरीके से भगवत भजन भी कर पाएंगे।इसीलिए उन्होंने अपने उक्त आश्रमों में शाम के वक्त का भोजन देने की व्यवस्था की है।भोजन के समय जो अन्य लोग भी आ जाते हैं उन्हे संतो के भोजन करने के बाद भोजन दिया जाता है क्योंकि वास्तव में यही ”नारायण सेवा” है। उन्होंने यह भी कहा था कि इस व्यवस्था में उनका कोई विशेष योगदान नही है । दानदाता उन्हें धनराशि दे जाते हैं तथा वे पोस्टमैन की तरह इस राशि को भोजन देने के रूप में रूप में बदल देते हैं।