किसान आंदोलन के आड़ में छिपे देश विद्रोही तत्वों से भारत सरकार सख्ती से निपटे - अजीत सिन्हा

       THE NEWS NOW के विशेष आग्रह पर श्री अजीत सिन्हा (प्रस्तावित नेताजी सुभाष पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक, सह प्रवक्ता) ने दिल्ली के आज के घटनाक्रम पर विशेष रूप से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है . हम आभारी हैं श्री सिन्हा के. 

     प्रस्तावित नेताजी सुभाष पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक सह प्रवक्ता अजीत सिन्हा ने कहा कि 72 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश के दिल राजधानी दिल्ली में जिस तरह से अराजकता फैलाई गई उससे लगता है कि किसान संगठन अपने आंदोलन की आड़ में राजधानी की स्तिथि और परिस्थित को अस्त - व्यस्त ही करना चाहते थे. वे अपने मंसूबे में कामयाब हो गये और भारत सरकार की सुरक्षा व्यवस्था धरी की धरी रह गई. गणतंत्र दिवस पर अराजक तत्वों द्वारा हमारे दिल्ली पुलिस के जवानों पर लाठी, दंडे, तलवार, कृपाण, रोड़े इत्यादि से हमला किया गया जो कि सर्वथा निंदनीय है और उनकी खराब मंशा को दर्शाता है.

(अजीत सिन्हा
     हद तो तब हो गई कि लाल किले के प्रांगण औऱ एक प्राचीर पर धर्म विशेष के झंडे को फहराया गया जो कि अपने देश के तिरंगे का अपमान ही है ,जिसकी जितनी भी निंदा की जाये वह कम ही होगी लेकिन दिल्ली पुलिस की सहनशीलता भी काबिल - ए - तारीफ थी. मार खा रहे थे और पीठ फ़ेर के जा रहे थे.  पूछता है भारत इस तरह के आदेश किसने दिये थे? कि दिल्ली पुलिस को इतना सहना पड़े। जिस तरह की स्थिति उसमें टियर गैस के गोले छोड़ना नाकाफ़ी था।  पुलिस को कठोरता से निपटने का आदेश मिलना चाहिए था, क्योंकि लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं. भारत सरकार की कोई सहनशीलता की सीमा है भी की नहीं या इस तरह के आंदोलन से निपटने की कार्यक्षमता का अभाव है क्योंकि दो महीनों से ऊपर चलने वाले आंदोलन को तो हिंसक होना ही था.  इस आंदोलन की आड़ में राष्ट्र विरोधी तत्वों को अपनी हाथ और रोटी सेंकने का मौका तो मिल ही गया.  इसके परिणाम स्वरूप भारत औऱ भारत सरकार की बदनामी पूरे विश्व में होगी सो अलग।


     जबकि मैंने अपने पहले के दिये हुये statement में स्पष्ट रूप से कहा था कि कि यदि intelligence की in put है तो वैसे राष्ट्र विरोधी तत्वों की पहचान कर तुरंत गिरफ्तार करे या उचित कानूनी कार्रवाई करें लेकिन आंदोलन को जिस तरीके से निपटे की कोशिश हो रही है,उससे समस्या घटने की जगह बढ़ती जा रही है. धर्म विशेष के झंडे फहराने वालों की आखिर क्या मंशा है? क्या वे एक बार पुनः देश को धर्मों के आधार पर विभक्त करना चाहते हैं.  राष्ट्र की एकता, संप्रभुता और सुरक्षा के साथ खिलवाड करना चाहते हैं लेकिन उन्हें पता होना चाहिये कि इस बार ऐसी विभाजन को तो न देश की जनता ही बर्दाश्त करेगी और न ही राष्ट्र पर मरने - जीने वाले राष्ट्र भक्त ही क्योंकि जिनके दिल में सरफरोशी की तमन्ना होती है वे राष्ट्र की संप्रभुता के साथ खिलवाड़ करने वाले को नहीं छोड़ते हैं और अपनी मातृभूमि पर सर्वश लुटाने को तैयार बैठे होते हैं।  जय हिंद!