प्रतिकूल परिस्थितियों में अनुकूल बजट की कल्पना व्यर्थ है - अजीत सिन्हा

      प्रस्तावित नेताजी सुभाष पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक सह प्रवक्ता अजीत सिन्हा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर भारत सरकार द्वारा जारी बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि महामारी के दौर में लोगों के सुविधा और इच्छा के अनुकूल बजट की कल्पना करना व्यर्थ है फिर भी सरकार ने राष्ट्र को मंदी से उबारने हेतु सकारात्मक और संतुलित बजट पेश करने की कोशिश की है और यह कोरोना के प्रहार से जूझने का एक प्रयास मात्र है और सरकार कितनी सफल होती है यह तो आने वाला समय ही बता पायेगा।

(Ajeet Sinha)

     75 वर्ष के ऊपर के पेंशन धारियों को आयकर रिटर्न दाखिल नहीं करने की घोषणा एक स्वागत योग्य कदम है, खासकर वैसे पेंशनधारकों के लिए जिनकी आय पेंशन के अलावे अन्य किसी स्रोत से नहीं है और उन्हें आयकर रिटर्न दाखिल करने से मुक्त रखा गया है . पुरानी घोषित इंकम टैक्स स्लैब के मुताबिक बैंक अब डायरेक्ट ही टैक्स के तौर पर उनका टीडीएस काट लेगी और इसका मतलब यह कदापि नहीं हो सकता है कि उन्हें टैक्स नहीं भरना पड़ेगा और उन्हें केवल इंकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग से केवल छूट है .एक तरह से देखा जाये तो इस तरह की घोषणा एक लॉलीपॉप के समान ही है 75 प्लस पेंशन धारियों के लिए .जैसा कि मध्यम वर्ग इस महामारी की दौर में और अधिक इंकम टैक्स में छूट की घोषणा का इंतजार कर रहे थे उन्हें मायूस होना पड़ा है, देखा जाये तो इस वर्ग को इस बिंदु पर खुश नहीं कर पाई सरकार। 

     सेंसेक्स में 24 साल बाद इतनी बड़ी उछाल आने से लगता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये यह सकारात्मक बजट है क्योंकि सेंसेक्स 5.09  की बढ़त के साथ बंद हुआ है और स्वास्थ्य बजट में 137 प्रतिशत की बढ़त यह इंगित करती है कि स्वास्थ्य मोर्चे पर सरकार भारतीय जनता के साथ-साथ वैश्विक जनता के प्रति भी अपने मानवता के दायित्वों को निभाने में सफल होगी।

     देश के लोगों को बेरोजगारी से निजात दिलाने के लिए सरकार ने छोटे व्यापारियों और उद्योग के क्षेत्र में शुरुआत करने वाले कंपनियों को प्रोत्साहित करने की झलक बजट में दिखाई देती है क्योंकि 50 लाख की सीमा को बढ़ाकर अब 2 करोड़ कर दी गई है और वे सभी अब एम एस एम ई सेक्टर के अंतर्गत आयेंगी। कृषि मंडियों के ढाँचा की मजबूती पर बल देते हुए जल्दी खराब होने वाले 22 फसलों को ऑपरेशन ग्रीन स्कीम के अंतर्गत जोड़ कर उनके निर्यात पर जोड़ दी गई है और इससे पहले केवल आलू, प्याज और टमाटर ही इस योजना में शामिल थे।

     सड़क परिवहन को 1.18 लाख करोड़, रक्षा क्षेत्र को 4.78  लाख करोड़, रेलवे को 1.10 लाख करोड़ और रियल एस्टेट को मंदी से उबरने के लिए किफायती घर खरीदने वालों को कर्ज पर मिली 1.5 लाख की छुट को एक साल के लिए बढ़ाई गई है।। रक्षा बजट में 25 हजार करोड़ की बढ़ोतरी हुई है जो यह इंगित करती है कि सरकार राष्ट्र सुरक्षा के प्रति सजग और सम्वेदनशील है लेकिन यह दुनिया को शस्त्रीकरण की ओर ले जाने वाली सोंच है। 

     मेरी समझ से प्रतिकूल समय में जनता के अनुकूल बजट तो नहीं लेकिन ऐसे समय में कैसी बजट की कल्पना की जा सकती थी? और यह जनता के विचार योग्य है। वंदे मातरम्, जय

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