सुप्रीम कोर्ट के बाद शिक्षा विभाग के आदेश की धज्जियां उड़ा रहे है स्कूल्स

 News from - अभिषेक जैन बिट्टू

फीस के अभाव में छात्रों की क्लास बन्द, कहा जहां जाना चले जाओ, जिसको कम्प्लेंट करनी है कर दो, अधिकारियों से हम स्वयं निपट लेंगे

     जयपुर। शहर में इन दिनों निजी स्कूलों में अर्द्ध-वार्षिक परीक्षाओ का दौर चल रहा है, इसी अर्द्ध-वार्षिक परीक्षाओ का सहारा लेकर निजी स्कूल्स अब अभिभावकों पर गैरजिम्मेदारा व्यवहार कर फीस जमा करवाने का दबाव बना रहे है। फीस जमा नही होने की स्थिति में बच्चों की ना केवल कक्षाएं बन्द कर रहे है बल्कि एक्जाम तक रोक दिए है। कुछ स्कूल तो ऐसे है जिन्होंने ना कानून का डर है ना सरकार का। उन्होंने बच्चों की स्कूल तक मे एंट्री बन्द कर दी है। ऐसे में शहर के अभिभावक परेशान हो रहे है। बहुत सारे ऐसे अभिभावक है जो रोजगार की तलाश में भटक रहे है, कई अभिभावक घर-मकान गिरवी रखकर स्कूलों की फीस जमा करवा रहे है तो कई अभिभावक लोन लेकर फीस जमा करवा रहे है। जबकि सुप्रीम कोर्ट 03 मई 2021 और 1 अक्टूबर 2021 को फीस मसले पर आदेश दे चुका है फीस के अभाव में ना एक्जाम रोके जा सकते है ना पढ़ाई उसके बावजूद बच्चों और अभिभावकों को परेशान किया जा रहा है। संयुक्त अभिभावक संघ का " राज्य सरकार और प्रशासन पर खुला आरोप है कि ना सरकार अभिभावकों की सुन रहा है ना शिक्षा विभाग कोई सुनवाई कर रहा है, सरकार और प्रशासन की चुप्पी ने स्कूलों को संरक्षण दिया हुआ है, पिछले एक महीने में पूरे प्रदेश से 50 से अधिक शिकायत संयुक्त अभिभावक संघ ने शिक्षा मंत्री, शिक्षा निदेशक, संयुक्त निदेशकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को भेजी, किन्तु किसी पर कोई कार्यवाही नही हुई।

     संयुक्त अभिभावक संघ प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि स्कूल मनमाने तरीके से अभिभावकों पर दबाव बना फीस वसूल रहे है, ना सुप्रीम कोर्ट की आदेश की पालना हो रही है ना ही शिक्षा विभाग के आदेशा का सम्मान कर रहे है। निजी स्कूलों में स्थिति इतनी विकट हो गई है की खुलेआम अभिभावकों और छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। कुछ ऐसी ही स्थिति रावत सी.से.स्कूल, विवेक विहार, डॉलफिन इंटरनेशनल स्कूल, नंदपुरी, सेंट एंसलम स्कूल, निवारू रोड़, एमपीएस इंटरनेशनल स्कूल, तिलक नगर, आशीष पब्लिक स्कूल प्रताप नगर सहित अजमेर, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा, नागौर, कोटा के अभिभावकों की शिकायत है कि फीस के अभाव में बच्चों की क्लास बन्द कर दी है, पूछने पर फीस जमा करवाने की पर्ची हाथों में थमा दी जाती है किंतु किस मद में फीस वसूल रहे है उसकी जानकारी नही दे रहे है, पूछने पर कहते है शिक्षा विभाग में सारी डिटेल दे दी है अगर शिकायत दर्ज करवानी है तो विभाग में शिकायत दर्ज करवा दो, हम शिक्षा विभाग से खुद निपट लेंगे।

प्रदेशस्तरीय बड़े आंदोलन की तैयारी जुटा संयुक्त अभिभावक संघ

     संयुक्त अभिभावक संघ प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार, शिक्षा विभाग और निजी स्कूल संचालक एक बार फिर अभिभावकों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर रही है। राजस्थान के निजी स्कूल लगातार अपने मनमाने तरीके से अभिभावकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के साथ-साथ अभिभावकों के अधिकारों का घोषण कर रहे है। प्रदेश के स्कूलों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना नही हो रही है और ना ही फीस एक्ट 2016 लागू किया जा रहा है। इससे प्रदेश का अभिभावक हताश और निराश है। जल्द ही प्रदेशस्तरीय आंदोलन की तारीखों का एलान कर दिया जाएगा। विभिन्न सामाजिक, व्यापारिक संगठनों से इस संदर्भ में चर्चा भी की जा चुकी है। जल्द ही एक सामूहिक बैठक कर प्रदेश में फैली बदहाल शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ अभिभावक सड़कों पर उतरेगा और राज्य सरकार सहित शिक्षा विभाग व निजी स्कूलों के खिलाफ मजबूती के साथ मोर्चा खोलेगा।

केंद्र सरकार लड़कियों की शादी करवाने की बजाय, स्कूलों में लड़कियों की सुरक्षा का बिल लेकर आये

     संयुक्त अभिभावक संघ प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज शर्मा ने कहा कि लड़कियों की शादी की उम्र 21 साल करने को लेकर केंद्र सरकार ने कैबिनेट में बिल पास किया है और इस बिल को लेकर लड़कियों के पढ़ाई करने और कैरियर बनाने के लिए समय उपलब्ध होने के दावे किए जा रहे है। किन्तु आज बच्चियों को पढ़ाई से ज़्यादा उनकी सुरक्षा व्यवस्था की चिंता हर घर को सता रही है। पहले तो लड़कियां सड़को, बाज़ारों में सुरक्षित नही रह पा रही थी किन्तु आज स्थिति इतनी विकट हो गई है कि शिक्षा के मंदिरों तक मे लड़कियां बिल्कुल भी सुरक्षित नही है। आज अभिभावक बच्चीयों को स्कूलों तक मे भेजने से कतरा रहे है। लड़कियों की शादी की उम्र निर्धारण करने वाले बिल से देश की जनता को कोई सरोकार नही है जनता को अगर सरोकार है तो लड़कियों की सुरक्षा से है जिस पर केंद्र और राज्यो की सरकार बिल्कुल भी गंभीरता नही दिखा रही है। 





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