भारत रत्न की शुरुआत डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 2 जनवरी 1954 में की थी

Article from - अरविन्द चित्रांश 

     देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान "भारत रत्न" की शुरुआत संविधान सभा के अध्यक्ष, तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 2 जनवरी 1954 में शुरुआत की थी. यह सम्मान राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है. इन सेवाओं में कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और खेल शामिल था लेकिन सरकार ने दिसंबर 2011 में "मानव प्रयास के किसी भी क्षेत्र" को शामिल करने के लिए मानदंडों का विस्तार किया। जिसकी स्थापना 2 जनवरी 1954 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी. पूर्वांचल के जाने-माने लोककला, संस्कृति एवं प्रकृति पर्यावरण संरक्षक अरविंद चित्रांश ने कहा कि देश, समाज, खेल और कला संस्कृतियों की, जी जान से, देश के हर नागरिक को भारत रत्न के लिए सेवा भाव से प्रयास करना चाहिए। मिले या ना मिले यह दूसरी बात है लेकिन हृदय में सेवा भाव की आत्म संतुष्टि रहेगी।

     पहला भारत रत्न पाने वाले भारत के डोमिनियन के अंतिम गवर्नर जनरल - सी.राजगोपालाचारी, दूसरे राष्ट्रपति और भारत के पहले उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन और नोबेल पुरस्कार विजेता, भौतिक विज्ञानी सी.वी. रमन, जिन्हें 1954 में सम्मानित किया गया था। तब से यह पुरस्कार 48 व्यक्तियों को दिया गया है. जिनमें से 14 को मरणोपरांत सम्मानित किया गया था। 

     मूल क़ानून में मरणोपरांत पुरस्कार प्रदान नहीं किया गया था लेकिन उन्हें अनुमति देने के लिए जनवरी 1955 में संशोधन किया गया था। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री मरणोपरांत सम्मानित होने वाले पहले व्यक्ति थे। 1992 में क्रांतिकारी शहीद सुभाष चंद्र बोस को मरणोपरांत पुरस्कार देने के सरकार के फैसले का उन लोगों ने विरोध किया। जिन्होंने उनकी मृत्यु के तथ्य को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था. 1997 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सुभाष चंद्र बोस के पुरस्कार की घोषणा करने वाली प्रेस विज्ञप्ति रद्द कर दी गई. यह एकमात्र समय है जब पुरस्कार की घोषणा की गई थी लेकिन प्रदान नहीं किया गया था.

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