रामपाल जाट ने मुख्यमंत्री, राजस्थान को ज्ञापन दिया

News from - किसान महापंचायत

     जयपुर। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने न्यूनतम समर्थन मूल्य की खरीद में होने वाली लूट को रोकने हेतु मुख्यमंत्री, राजस्थान को एक ज्ञापन दिया।  

माननीय श्री अशोक गहलोत 

मुख्यमंत्री, राजस्थान

13, सिविल लाइन – जयपुर

विषय :- न्यूनतम समर्थन मूल्य की खरीद में होने वाली लूट को रोकने हेतु। 

सन्दर्भ : मूल्य समर्थन योजना 

मान्यवर, 

उक्त संदर्भित विषय में ज्ञापन निम्न प्रकार है :- 

1. यह कि बोरी / कट्टा के वजन के अतिरिक्त राजस्थान में सरसों एवं चना की न्यूनतम समर्थन मूल्य की खरीद में एक क्विंटल पर 400 ग्राम अधिक तुलाई कर वसूली की जा रही है, जो सरकारी नियमों के विपरीत है। इस कारण यह लूट की श्रेणी में आती है । 1 मई 2023 तक राजस्थान में सरसों की खरीद 30323.84 तथा चना 38167.5 मैट्रिक टन खरीदा जा चुका है। 

     अनुमानत: एक क्विंटल पर 400 ग्राम के अनुसार अभी तक दोनों उपजो पर किसानों से 273.97 मैट्रिक टन अधिक लिया जा चुका है, जिसका मूल्य 1,47,55,541.6 रुपये है । सरकारी खरीद केन्द्रों पर इस प्रकार की लूट, वह भी सरकार की नाक के नीचे, सरकारी अधिकारियों के संरक्षण एवं सहयोग से हो रही है, जिनका काम लूट को रोकना है, वे ही इस लूट में भागीदार बने हुए हैं । 

     कुछ खरीद केंद्रों के प्रभारी अधिकारी तो कागजों में वैधानिक (DEJURE) प्रभारी बने हुए हैं एवं प्रभार का वास्तविक (DEFECTO) रूप से नियंत्रण एवं संचालन का काम तो परिवहन एवं उतराई-चढाई के ठेकेदारो द्वारा किया जा रहा है । इसमें सरकारी अधिकारियों को आराम है, इसमे उन्हें किसी से कुछ कहना पड़ता, न हीं उन्हें किसी की सुननी पड़ती है, यह सारा काम उनकी ओर से ठेकेदारों द्वारा ही किया जा रहा है । लूट की यह राशि बड़ा घोटाला है, जिसकी सत्यता निष्पक्ष जांच से सामने आ जाएगी ।

2. यह कि खरीद केंद्र के अधिकारी निर्धारित मात्रा से 400 ग्राम अधिक वसूलने का कारण नेफेड को बताते हैं , उनके अनुसार खरीद के बाद नेफेड के अनुसार खरीदी गई उपजो को गोदामों में जमा कराने जाते हैं तब उनका वजन कम बता देते हैं । यदि ऐसा करते हैं तो राज्य सरकार के संज्ञान में लाकर इसे सुधारा जा सकता है किंतु खरीद केंद्र के अधिकारी उसको सुधारने के स्थान पर प्रति क्विंटल 400 ग्राम अधिक वसूली के विकल्प को स्वीकार किए हुए हैं । राजफेड एवं नेफेड के बीच में आंख मिचोली के खेल का खामियाजा तो उत्पादक किसानों को ही भोगना पड़ रहा है । उसे असाध्य बीमारी बताना बहानेबाजी का आधार बनाया हुआ है ।

3. यह कि अभी तक स्वीकृत खरीद केंद्रों में से 215 केंद्रों पर तो 1 मई तक तुलाई का काम आरंभ भी नहीं हुआ । जिन 422 केंद्रों पर तुलाई आरंभ होना दर्शाया गया है, वहां भी नियमित तुलाई नहीं चल रही है तथा अनेक केन्द्रों पर तो नाम मात्र की खरीद हो रही है । 

     प्रतीत होता है कि निजी खरीददार - व्यापारियों को लाभान्वित करने के लिए खरीद में उदासीनता एवं ढिलाई बरती जा रही है । एक क्विंटल सरसों एवं चने के बाजार मूल्य एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य से 1000 रुपये कम हैं । इसका सीधा लाभ निजी खरीददार - व्यापारियों को ही होता है । अभी सरसों की खरीद 30323.84 एवं चना 38167.5 मै. टन हुई है । 

     राजस्थान सरसों उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है जहां संपूर्ण देश का 49% तक सरसों का उत्पादन होता है । एक समान अवधि में कुल खरीद में से राजस्थान का प्रतिशत 3.08 है जबकि हरियाणा की खरीद 82.22, गुजरात 8.24 तथा मध्यप्रदेश 6.47 प्रतिशत है । इसी प्रकार चना उत्पादन में राजस्थान देश में दूसरे / तीसरे स्थान पर रहता है,  उसकी खरीद राजस्थान में 0.72 प्रतिशत है, जबकि महाराष्ट्र 42.84, मध्य प्रदेश 21.77, गुजरात 19.33, उत्तर प्रदेश 0.10, कर्नाटक 5.98, तेलंगाना 4.51 प्रतिशत है । उत्तर प्रदेश में चना खरीद के अतिरिक्त अन्य राज्यों की तुलना में खरीद के संबंध में राजस्थान फिसड्डी बना हुआ है । 

4. यह कि सरसों एवं चना की उपजो के उत्पादन में से 25% से अधिक केंद्र द्वारा खरीद नहीं की जाती है । उसके अनुसार राज्यों के कुल उत्पादन का चौथाई भाग तक ही खरीद के लक्ष्य का निर्धारण किया जाता है । खरीद के निर्धारित लक्ष्य में से भी सरसों की खरीद 2 प्रतिशत तथा चना की खरीद 5.74 प्रतिशत  है । कुल उत्पादन में से तो सरसों की 0.47 एवं चना की खरीद 1.43 प्रतिशत ही है । सरकार द्वारा अधिकतम 90 दिन ही खरीद की अवधि रखी हुई है । उसमें से एक तिहाई समय समाप्त हो चुका किंतु खरीद एक तिहाई का दशांश भी नहीं हुई है । यह खरीद 30 जून तक होनी है इसी गति से कार्य होने पर तो खरीद का निर्धारित लक्ष्य प्राप्त होना तो संभव नही है । खरीद नहीं होने के कारण किसानों को एक क्विंटल पर अनुमानित 1000 रुपये का घाटा होना निश्चित है ।

5. यह कि एक रोचक तथ्य यह भी है कि सरसों के लिए पंजीकरण की क्षमता 5,46,825 दर्शाई गई है जिसमें से अभी तक 92488 किसानों को ही पंजीकृत किया गया है, यानि 17% से कम किसानों का ही पंजीकरण हुआ है । यही स्थिति चने में है जिसकी पंजीकरण की क्षमता 2,39,325 दर्शाई गई है और पंजीकरण  90,301 किसानो का किया गया है, यह भी 38% से कम है फिर पंजीकृत किसानों में से एक तिहाई समय बीत जाने के बाद भी सरसों में 15.19 तथा चना में 20.16 किसानो से ही खरीद की गई है, जो एक तिहाई संख्या तक भी नहीं पहुंचती है । 

6. यह कि एक खरीद केन्द्रों पर पल्लेदारों की मजदूरी निर्धारित राशि से अधिक वसूल की जाती है जिसे छिपाने के लिए खरीद केंद्रों पर इनका प्रकाशन नहीं किया जाता है जबकि वह नियमों में अनिवार्य किया हुआ है । इसी प्रकार छानाई (ग्रेडिंग) के नाम पर जो मशीन लगाई हुई है, उसकी दरें भी प्रति क्विंटल 70 से आरंभ की जाती है, इन दरो का भी सार्वजानिक रूप से प्रकाशन नहीं किया जाता है। 

     इस प्रकार का उपकरण लगाने के लिए कोई टेंडर भी किया जाता है बल्कि खरीद केंद्रों के स्तर पर एक दूजे को उपकृत करने के लिए ही स्वेछाचारी दरे थोप दी जाती है । किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने की घोषणा तो दूर की कौड़ी बनी हुई है । जिन किसानों से खरीद की जा रही है उनकी विवशता का भी अनुचित लाभ लेने में खरीद केंद्रों पर कोई कमी नहीं छोड़ी जाती, इससे “परम स्वतंत्र न सिर पर कोई” की उक्ति चरितार्थ हो रही है । 

     इन विषयों की चर्चा पहली बार नहीं हो रही बल्कि 2010 से लेकर अब तक निरंतर अधिकारियो एवं सरकार के सामने इस प्रकार की लूट को बंद करने का आग्रह निरंतर किया जा रहा है । इसके संबंध में ‘लूट रहित खरीद’ के ज्ञापनो के अतिरिक्त बजट पूर्व बैठकों के लिखित सुझावों में भी इसका उल्लेख किया हुआ है ।

7. यह कि उक्त तथ्यों को जाँच की जाकर इस लूट को रोकते हुए दोषी अधिकारी एवं कर्मचारियों को दण्डित करने सहित खरीद को गति प्रदान करने के लिये प्रणाली विकसित करना जनहित में आवश्यक है 

अत: ज्ञापन प्रस्तुत कर श्री मन से विनम्र प्रार्थना है कि खरीद को गति प्रदान करने हेतु समुचित खरीद प्रणाली विकसित करने एवं लूट को तत्काल रोकते हुए दोषी अधिकारियो एवं कर्मचारियों को दण्डित करने का आदेश प्रदान किया जावे । 

रामपाल जाट (राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान महापंचायत)