चीनी आक्रामकता के खिलाफ फ्रांस, जापान समेत कई देशों ने समुद्री सहयोग के लिए मिलाया हाथ

     चीन पर कोरोनावायरस महामारी फैलाने को लेकर दुनियाभर के विभिन्न देशों ने सवाल खड़े किए हैं। चीन अब जमीन से लेकर समुद्र तक अपनी विस्तारवादी नीति के तहत इस मुद्दे से दुनिया का ध्यान भटकाने की पुरजोर कोशिशों में लगा हुआ है। ऐसे समय में दुनिया भर की ताकतें चीन का मुकाबला करने के लिए हाथ मिला रही हैं।



      गलवान घाटी की घटना चीन की डराने की उसकी नीति का सिर्फ एक ऐसा उदाहरण है और समुद्र में आक्रामक कदम पहले ही पड़ोसियों के लिए एक चेतावनी संकेत के रूप में सामने आ गए हैं। इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि चीन का आक्रामक राष्ट्रवाद और सैन्य विस्तारवाद एक वास्तविकता है, जो कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के नेताओं द्वारा जताई गई नीतियों से प्रेरित है।


      समाचार एजेंसी के मुताबिक, एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने कहा, "इन नीतियों के परिणामस्वरूप यह धारणा बन गई है कि बीजिंग अपने द्वारा बनाए गए कानून के अलावा किसी अन्य कानून का सम्मान नहीं करता है। अगर वह किसी की संपत्ति को हथियाने का कोई तरीका ढूंढ़ ले, तो वह उनके संपत्ति अधिकारों का भी सम्मान नहीं करता।" अधिकारी ने कहा कि चीन किसी सीमा या बॉर्डर का भी सम्मान नहीं करता है और अगर उसे किसी क्षेत्र पर कब्जा करने का तरीका दिख जाए तो वह संबंधित देश को डरा-धमका कर अपनी विस्तारवादी नीति पर काम करना शुरू कर देता है।


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