ऐसे निभाई साथ जीने-मरने की कसम, पति के शव को प्रणाम कर पत्‍नी ने भी तोड़ा दम

     अग्नि को साक्षी मान सात फेरे लेते वक्‍त साथ जीने-मरने की संतकबीर नगर के सीताराम और उनकी पत्‍नी मालती की कसम पूरी हुई। करीब 70 साल की उम्र पार कर चुके इस दम्‍पत्ति का एक-दूसरे के लिए प्‍यार जानने वालों के बीच मशहूर था। सोमवार को जब दोनों ने चंद घंटों के अंतराल पर दुनिया को अलविदा कह दिया तो उन्‍हें जानने वाला हर शख्‍स रो पड़ा। 



     दिलों को झकझोर देने वाला ये मंजर मंगलवार को संतकबीर नगर के खलीलाबाद कोतवाली के भैंसहियां गांव में सामने आया। सात जन्मों तक साथ निभाने का वायदा करने वाली धर्मपत्नी ने दुनिया को छोडऩे में भी अपने पति का साथ निभाया। सेवानिवृत्त शिक्षक सीताराम की मृत्‍यु 70 साल की उम्र में सोमवार को हो गई। वह पिछले कई वर्षों से कैंसर से पीडि़त थे। रात भर उनका शव लोगों के अंतिम दर्शन के लिए घर पर रहा। सुबह परिवार के लोग अंतिम संस्‍कार की तैयारियों में जुटे। सारी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। लोग अंतिम दर्शन कर रहे थे। इसी बीच सीताराम की पत्‍नी मालती देवी भी अंतिम दर्शन के लिए पहुंची। 


     बताते हैं कि जैसे ही उन्‍हें उनके पति का चेहरा दिखाया गया उनकी हालत बिगड़  गई। वह अपने पति के निधन का दु:ख बर्दाश्‍त नहीं कर सकीं। सम्‍भवत: उन्‍हें दिल का दौरा पड़ा और वहीं निधन हो गया। परिवार के दोनों मुखिया के एक साथ दुनिया छोड़ कर चले जाने से परिवार जनों के बीच गहरा शोक फैल गया। दोनों के शव के पास परिवार के लोग देर तक रोते रहे। फिर मालती देवी की भी अर्थी सजाई गई। दोनों के शव अलग-बगल रखे गए। दोनों की शवयात्रा एक साथ निकली तो परिवार के साथ मोहल्‍ले वालों ने भी श्‍मासान घाट तक बारी-बारी कंधा दिया। 


जलाने की बजाए दफन किया  - दम्‍पत्ति के एक साथ निधन से शोकाकुल परिवारीजनों ने हिन्‍दू रीति रिवाजों से उनके शवों को जलाने की बजाए दफन किया। दोनों को एक ही साफ दफन किया गया। उनके बेटे दिलीप ने बताया कि उनके पि‍ता ने कहा था कि मृत्यु के बाद उन्हें जलाया न जाए बल्कि उन्हें अपने खेत में दफनाया जाए। साथ ही यह भी कह रखा था कि जब मां की मृत्यु हो तो उन्हें भी बगल में दफनाया जाए। उनकी इच्छा का ख्याल रख दफनाया गया है।