आखिर "नेताजी सुभाष पार्टी "के गठन की आवश्यकता क्यों हुई ?

 From - डॉ शिव शरण"अमल"

     भारत मे वर्तमान मे 2293 पंजीकृत क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनीतिक दल हैं, इसके बाद भी एक और राजनीतिक दल की आवश्यकता क्यो महसूस की गई ? आइए इस पर विचार करते हैं। भारत में आजादी के बाद से लगभग 70 वर्षो के सफर में केंद्र में कांग्रेस और कांग्रेस समर्थित पार्टियों ने अधिकांश समय तक शासन किया है, फिर भारतीय जनता पार्टी और उसकी समर्थित पार्टियों का नंबर आता है। कांग्रेस ने राष्ट्र हित की जगह व्यक्तिगत और दलगत हित को ज्यादा महत्व देकर मुस्लिम और ईसाइयों के तुष्टिकरण की नीति अपनाकर शासन किया ।

     छद्दम धर्म निरपेक्षता के नाम पर सनातन धर्मावलबियों के विरुद्ध लगातार षडयंत्र किए गए, भगवा आतंकवाद का नाम करण किया गया, "भारत तेरे टुकड़े होगे" जैसे नारे लगाने वालो को संरक्षण दिया गया, जहां हिंदू साधु संतों पर आरोप लगने में जमानत नहीं मिलने दी. वहीं पादरी और मौलवियों के खिलाफ संगीन धाराओं मे मुकदमे दर्ज होने के वावजूद जमानत भी मिली तथा बेगुनाह भी घोषित किए गए. कमोवेस  अन्य राजनीतिक दलों जैसे आरजेडी, बीएसपी, समाजवादी, वामपंथी आदि की भी यही रीतिनीति रही है।

     बीजेपी को "सबका साथ सबका विकास सबका विश्वाश" वाली पार्टी मानकर पूर्ण बहुमत से देश की जनता ने सत्ता सौंपी और बीजेपी ने कुछ अच्छे कार्य जैसे धारा 370 को हटाना, राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त करना, NRC, लागू करना, पाकिस्तान और चीन को करारा जवाब देना, आदि किए भी, परन्तु तथा कथित दलित हितैषी होने की होड़ के कारण अप्रत्यक्ष रूप से देश विरोधी ताकतों को ही बढ़ावा देने का कार्य वर्तमान मे कर रही है।

(प्रस्तावित) 

       जिन तथा कथित दलितों के तुष्टीकरण की नीति पर बीजेपी चल रही है दरअसल वे दलित समाज के शोषक ही हैं , ये कुछ मुट्ठी भर चतुरचालक लोग दलितों के नाम से पीढ़ी दर पीढ़ी आरक्षण का लाभ भी ले रहे हैं और देश विरोधी तत्वों का समर्थन भी कर रहे हैं,  कथित दलित नेताओं का एक वर्ग"भीम, मीमभाई, भाई" के नारे लगवाकर देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा पैदा कर रहा है, तथाकथित दलित नेताओं का एक वर्ग ऐसा भी है जो धर्मान्तरण का पक्षधर है और ईसाई धर्म अपनाकर भी आरक्षण का लाभ ले रहा है, तथाकथित दलित नेताओं का एक वर्ग ऐसा भी है जो खुले आम "तिलक, तराजू, पेन, तलवार_इनको मारो जूता चार"जैसे नारों के बलपर सत्ता में काबिज होने हेतु प्रयासरत हैं, यह वर्ग खुले आम सवर्णो को भारत से बाहर भगाने की वकालत कर रहा है।

     बीजेपी इनके दवाब के आगे आकर sc,st एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटकर, जातिगत आरक्षण को बिना समीक्षा 10 साल हेतु बढ़ाकर, तथा प्रमोशन मे जातिगत आरक्षण की वकालत करके अप्रत्यक्ष रूप से देश बिरोधो गतिविधियों को ही संरक्षण दे रही है। असली दलित, वंचित, शोषित तबका अभी भी विकास की मुख्य धारा से बहुत दूर है और ये तथाकथित दलितों के हमदर्द राजनीतिक दल उनका सिर्फ ताली बजवाने और वोट लेने के लिए ही इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें परम्परा के नाम पर घोटुल जैसी प्रथाओं मे उलझा कर के रखा जा रहा है।

     रही _सही कसर बीजेपी ने गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत का लाभ देकर सनातन एकता में एक और कुठाराघात कर दिया, अगर बीजेपी को सचमुच गरीब सवर्णों की चिंता होती तो आरक्षित कोटे से इन्हे आरक्षण देती ,लेकिन उसने आरक्षण का कोटा ही बढ़ा दिया, सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित किए जाने के आदेश के वावजूद कई राज्यों में आरक्षित कोटा 82 प्रतिशत तक पहुंच गया है, ऐसी स्थिति में भारत का फिर से विश्व गुरु बनने का सपना साकार हो पाना असम्भव ही है।

    इसके अलावा राजनीति मे अपराधियो की बढ़ती दखलंदाजी, भाई_भतीजावाद, परिवारवाद, भ्रष्टाचार, आदि में पिछले सत्तर सालों से कोई सुधार परिलक्षित नहीं हो रहा है।

      उपर्युक्त दर्शाए गए कुछ विंदु उदाहरण मात्र ही हैं, इस तरह के सैकड़ों क्रिया कलाप में सत्ता पक्ष और विपक्ष संलग्न है जिसमे देश हित का कही नामो_निशान भी नहीं दिखाई पड़ता, बल्कि देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा बढ़ता ही जा रहा है।

     ऐसी स्थिति में आवश्यक है  एक ससक्त राजनीतिक दल की जो सार्थक विकल्प बनकर देश को वर्तमान समस्याओं से उबारकर विश्व गुरु बनाने की दिशा मे अग्रसर हो सके। उम्मीद है कि नवगठित राजनीतिक दल "नेताजी सुभाष पार्टी"इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगी और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के बताए मार्ग पर चलकर उनके सपनों को पूरा करेगी।

     आइए सभी देश भक्त मिलजुलकर नेताजी सुभाष पार्टी को तनमन_धन से सहयोग करके देश के लिए कुछ कर गुजरने मे अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।