"क्षमा" वीरों का अनमोल "आभूषण" जो वीर होते है वह क्षमा के भावों को धारण करते है - गणिनी आर्यिका गौरवमती

News from - अभिषेक जैन बिटटु  

क्षमा वीरस्य भूषणम .....

     जयपुर। छोटी काशी के नाम से विख्यात धर्मनगरी जयपुर शहर के श्याम नगर स्थित वशिष्ठ मार्ग आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के प्रांगण पर गणिनी आर्यिका रत्न गौरवमती माताजी ससंघ पावन एवं मंगल सानिध्य में दिगम्बर जैन समाज ने "सामूहिक क्षमावाणी पर्व" श्रद्धा-भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया।  क्षमावाणी पर्व शुभावसर पर मूलनायक आदिनाथ भगवान के स्वर्ण एवं रजत कलशों से पंचामृत कलशाभिषेक का आयोजन हुआ। इसके उपरांत गणिनी आर्यिका गौरवमती माताजी के मुखारविंद जगत के कल्याण, प्रत्येक प्राणियों से हुई त्रुटियों की क्षमायाचना और कोरोना महामारी से मुक्ति की प्रार्थना करते हुए वृहद शांतिधारा का भव्य आयोजन किया गया। 

     इसके पश्चात गणिनी आर्यिका गौरवमती माताजी ने क्षमावाणी पर्व के अवसर पर अपने विशेष उद्बोधन में सभा को सम्बोधित करते हुए अपने आशीर्वचन में कहा की " आज क्षमावाणी का सबसे उत्तम पर्व है जो पर्वो में सबसे श्रेष्ठ पर्व माना गया है, क्योकि इस दिन क्षमा के भावों को वही लोग धारण करते है जो वीर होते है, क्षमा विरों का सबसे श्रेष्ठ आभूषण है जो क्षमा धारण कर बिना गलती के भी क्षमा मांग ले वह सबसे बड़ा वीर है इस जगत के प्रत्येक प्राणी को एक दूसरे के प्रति सदैव क्षमा के भावों को बनाए रखना चाहिए। क्योकि कुछ गलतियां जानबूझकर भूलवश हो जाती है और कुछ गलतियां ऐसी होती है जो अनजाने में हो जाती है। क्षमा मांगने वाला या क्षमा देने वाला कभी छोटा या बड़ा नहीं बनता अपितु वह क्षमा भाव धारण कर अपने बड़पन से एक-दूसरे के मतभेदों को विश्वास में बदल सकता है। इसलिए प्रत्येक प्राणी को क्षमा के भावों को धारण करना चाहिए। " 

     क्षमा आभूषण है जिसको पहने से प्रत्येक प्राणी की किस्मत और भविष्य दोनों स्वर्ण की तरह 24 केरेट गोल्ड की तरह निखर जाती है - गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री

 

    सामूहिक क्षमावाणी पर्व के अवसर पर गणिनी आर्यिका रत्न विज्ञाश्री माताजी का वशिष्ठ मार्ग दिगम्बर जैन मंदिर में मंगल प्रवेश हुआ और पड़वा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा की " क्षमा एक भाव है जिसे प्रत्येक प्राणी को अवश्यक रूप से धारण करना चाहिए, इस भाव को धारण करने से प्राणी दुसरो में विश्वास के साथ खुद में भी विश्वास जगा सकता है। क्षमा ऐसा आभूषण है जिसको पहने से प्रत्येक प्राणी की किस्मत और भविष्य दोनों स्वर्ण की तरह 24 केरेट गोल्ड की तरह निखर जाते है, मतभेद से मनभेद होने में समय नहीं लगता किन्तु क्षमा भाव के धारण करने से आत्मविश्वास की प्राप्ति तुरंत प्रभाव से हो जाती है। यह पर्व केवल श्रावको का ही नहीं बल्कि साधु समाज का भी सबसे बड़ा पर्व है, जिसमे साधु समाज के सभी संत भी क्षमा के भावों को धारण कर इन आभूषणों का श्रृंगार करते है और सभी से क्षमा भी मंगाते है और सबको क्षमा भी प्रदान करते है। "

आर्यिका संघो का हुआ मंगल मिलन, संतों में भी मांगी क्षमायाचना

     मंगलवार को सामूहिक क्षमावाणी के अवसर पर वशिष्ठ मार्ग स्थित महावीर दिगम्बर जैन मंदिर और आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर दोनों में प्रातः 8.30 बजे से सामूहिक पड़वा कार्यक्रम आयोजित किये गए। इस दौरान विवेक विहार दिगम्बर जैन मंदिर में चातुर्मास कर रही गणिनी आर्यिका रत्न विज्ञाश्री माताजी ने भी विवेक विहार से विहार कर वशिष्ठ मार्ग जैन मंदिरों में मंगल प्रवेश किया। जहां पर गणिनी आर्यिका रत्न गौरवमती माताजी ससंघ ने गणिनी आर्यिका रत्न विज्ञाश्री माताजी ससंघ की मंगल अगवानी की। इस दौरान सर्व प्रथम प्रातः 8.30 बजे से आर्यिका संघों के सानिध्य में महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में श्रीजी के कलशाभिषेक एवं शांतिधारा हुई और इसके बाद आर्यिका संघ के मंगल प्रवचन सम्पन्न हुए। इसके बाद प्रातः 9.30 बजे से आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में श्रीजी के स्वर्ण एवं रजत कलशों से पंचामृत कलशाभिषेक एवं वृहद शांतिधारा का आयोजन सम्पन्न हुआ।

     इसी दौरान सामूहिक क्षमावाणी पर्व भी मनाया गया जिसके श्रावक-श्राविकाओं ने ही नही सभी त्यागी-तपस्वीयों सहित आर्यिका संघों में विराजमान सभी आर्यिका, क्षुल्लिका माताजी एवं ब्रह्मचारी बाई जी, दीदियों ने भी एक-दूसरे के प्रति क्षमा के भावों को धारण कर क्षमायाचना की जिसे देखकर समाजबंधु भक्ति-विभोर हो उठे और जैन धर्म की जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय माहौल में कर दिया। इस दौरान समाजसेवी भागचंद बाकलीवाल, राजकुमार पाटनी, अध्यक्ष निहालचंद पांड्या, मंत्री सुभाष जैन, सुरेश सबलावत, राजकुमार सेठी, राजेश सेठी, प्रदीप चूड़ीवाल, प्रवीण बड़जात्या, नरेंद्र छाबड़ा, बसंत बाकलीवाल, सर्वेश जैन, अजित पाटनी, राजेन्द्र बड़जात्या आदि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे और एक-दूसरे को खोपरा-मिश्री का सेवन करवा क्षमा याचना की।

शहर के जैन मंदिरों में आचार्य श्री, मुनि श्री, आर्यिका माताजी ससंघ सानिध्य में मनाया "क्षमावाणी पर्व"

     अखिल भारतीय दिगम्बर जैन युवा एकता संघ अध्यक्ष अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि मंगलवार को जयपुर सहित पूरे देशभर के जैन मंदिरों में सामूहिक क्षमावाणी पर्व की धूम रही, क्षमावाणी पर्व के अवसर पर जयपुर के कीर्ति नगर स्थित पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में आचार्य कुशाग्रनंदी महाराज, दुर्गापुरा स्थित

चन्द्रप्रभ दिगम्बर जैन मंदिर में आचार्य शंशाक सागर महाराज ससंघ, विवेक विहार स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में गणिनी आर्यिका रत्न विज्ञाश्री माताजी ससंघ, सांगानेर स्थित चित्रकूट कॉलोनी दिगम्बर जैन मंदिर में आर्यिका भरतेश्वरी माताजी ससंघ सानिध्य में सामूहिक क्षमावाणी पर्व श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया गया। इस दौरान श्रीजी के कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन होने के पश्चात " क्षमावाणी पर्व " पर विशेष सम्बोधन हुआ। इस बीच प्रबन्ध कमेटियों द्वारा खोपरा-मिश्री की व्यवस्था रखी गई जिसके सेवन के साथ समाजबंधुओं ने एक-दूसरे से हाथ जोड़कर, पैरों को छूकर, एक-दूसरे से गले लगकर क्षमा याचना की।

शहरभर के जैन मंदिरों में मनाई गई "क्षमावाणी"

     प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद बाकलीवाल ने बताया कि "क्षमावाणी" पर्व के अवसर पर शहरभर के सभी दिगम्बर जैन मंदिरों में आयोजन सम्पन्न हुए। जिसमे अतिशय क्षेत्र बाड़ा पदमपुरा दिगम्बर जैन मंदिर, वाटिका स्थित नवग्रह दिगम्बर जैन मंदिर, लाखना स्थित आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, बड़ के बालाजी स्थित सुपार्श्व गार्डन सिटी के चन्द्रप्रभ दिगम्बर जैन मंदिर, आगरा रोड़ स्थित चूलगिरी दिगम्बर जैन मंदिर, जनकपुरी-ज्योति नगर, सांगानेर संघी जी, प्रताप नगर सेक्टर 8 और 3, सूर्यनगर तारों की कूट, जय जवान कॉलोनी, एसएफएस कॉलोनी, मीरा मार्ग, थड़ी मार्किट, वरुण पथ, हीरा पथ, केसर चौराहा, पारस विहार मुहाना मंडी, राधा निकुंज कॉलोनी, इंजीनियर्स कॉलोनी, त्रिवेणी नगर, 10 बी स्किम, कीर्ति नगर, बरकत नगर, राधा विहार, सिविल लाइन्स, जवाहर नगर, आदर्श नगर, कमला नेहरू नगर, झोटवाड़ा, कालवाड़ रोड़, वैशाली नगर, नेमी सागर कॉलोनी, छोटी चौपड़, बड़ी चौपड़, चांदपोल, त्रिपोलिया, सुभाष चौक, मालवीय नगर, जगतपुरा आदि सहित सभी दिगम्बर जैन मंदिरों में पड़वा के अवसर पर श्रीजी के कलशाभिषेक, शांतिधारा का आयोजन कर सामूहिक क्षमावाणी पर्व मनाया गया।

ना कोई छोटा ना कोई बड़ा सभी समाजबंधुओं ने एक-दूसरे को खोपरा-मिश्री खिलाकर मांगी माफी

     क्षमावाणी का पर्व ना किसी को छोटा साबित करने का पर्व है ना किसी को बड़ा बनाने का पर्व है यह पर्व केवल इंसान को इंसान बनाने का पर्व है, इस पर्व को महत्व प्रदान करने के लिए सभी समाजबंधु एक-दूसरे को गले लगाकर, पैरों को छूकर एक-दूसरे के प्रति बनाये सभी राग-द्वेषों मिटाने के लिए, जाने-अनजाने में की गई भूल-चुक के लिए क्षमा के भावों को धारण कर एक-दूसरे से क्षमा याचना करते है और खोपरा-मिश्री का सेवन कर अपने राग-द्वेषों को मिटाते है।